जलदान वैतरणी की यातना से बचाता है। जिसने जलदान किया उसे यहाँ राहत मिलती है। न करने वाले को रक्त-मवाद के जल में तृप्त होना पड़ता है। 'जल का दान क्यों नहीं दिया' — यमदूत यही उलाहना देते हैं।
गरुड़ पुराण में जलदान और वैतरणी के संबंध का वर्णन भूख-प्यास की पीड़ा के संदर्भ में मिलता है।
वैतरणी में जल का स्वरूप — वैतरणी नदी में स्वच्छ जल नहीं है। इसमें रक्त, मांस, मवाद और दुर्गंधयुक्त द्रव बहता है।