रामचरितमानस — बालकाण्ड
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जनक की निराशाजनक वाणी सुनकर लक्ष्मणजी को कैसा लगा?
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संक्षिप्त उत्तर
लक्ष्मणजी को बड़ा क्रोध आया — रघुकुल का अपमान समझा। कहा — आज्ञा हो तो ब्रह्माण्ड गेंद-सा उठा लूँ, मेरु पर्वत मूली-सा तोड़ दूँ, कच्चे घड़े-सा फोड़ दूँ — यह पुराना धनुष तो क्या चीज़ है!
जनक की निराशाजनक वाणी सुनकर लक्ष्मणजी को बड़ा क्रोध आया। उन्हें लगा कि जनक ने रघुकुल (सूर्यवंश) का अपमान किया — पृथ्वी को वीरविहीन कहकर।
लक्ष्मणजी ने कहा — 'सुनहु भानुकुल पंकज भानू। कहउँ सुभाउ न कछु अभिमानू। जौं तुम्हारि अनुसासन पावौं।
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