जनकपुर में राजा जनक ने विश्वामित्रजी का कैसे स्वागत किया?
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संक्षिप्त उत्तर
जनक ने ब्राह्मणों के साथ आकर दण्डवत किया, आसन दिया, चरण पखारे, भोजन करवाया। रामजी को देखकर मुग्ध हो गये — 'जनु चकोर पूरन ससि लोभा' — जैसे चकोर पूर्ण चन्द्रमा देखकर लुभा जाये।
राजा जनक ने विश्वामित्रजी का अत्यन्त आदरपूर्वक स्वागत किया।
जब जनक को विश्वामित्रजी के आगमन का समाचार मिला तो वे ब्राह्मणों के समाज को साथ लेकर मिलने गये, दण्डवत करके मुनि का सम्मान किया और अपने आसन पर बैठाया।