सीताजी अनुपम सौन्दर्य, शील और सुलक्षणों से प्रसिद्ध थीं। नारदजी ने 'सारे जगत में पूज्य' कहा था। सखियाँ उनकी शोभा देखकर अपने-आपको भूल जातीं। जनकपुर की स्त्रियाँ रामजी से उनके विवाह की कामना करती थीं।
बालकाण्ड में सीताजी की प्रसिद्धि उनके अनुपम सौन्दर्य, शील और गुणों के कारण बताई गई है।
जनकपुर में सीताजी को 'सब लच्छन संपन्न कुमारी' (सब सुलक्षणों से सम्पन्न) कहा गया।