जन्माष्टमी पर दही हांडी की परंपरा का पौराणिक आधार क्या है?
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संक्षिप्त उत्तर
दही हांडी आधार: भागवत दशम स्कन्ध — बालकृष्ण+ग्वाल=गोपियों का माखन चुराना। ऊँची मटकी=गोपी रक्षा, मानव पिरामिड=ग्वाल, शीर्ष=कृष्ण (गोविन्दा)। पुनराभिनय। महाराष्ट्र=भव्य। 'गोविन्दा आला रे!'
दही हांडी = जन्माष्टमी के अगले दिन (नन्दोत्सव) = बालकृष्ण की माखन चोरी लीला: पौराणिक आधार (भागवत पुराण दशम स्कन्ध): गोकुल-वृन्दावन में बालकृष्ण ग्वाल सखाओं के साथ गोपियों का माखन-दही चुराते थे।
गोपियाँ माखन ऊँचाई पर (छत से लटकी मटकी) रखती — कृष्ण ग्वालों के कंधों पर चढ़कर हांडी तोड़ते।