त्योहार पूजा
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जन्माष्टमी पर कंस वध की लीला का आध्यात्मिक संदेश क्या है?
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संक्षिप्त उत्तर
कंस वध: कंस=अहंकार/भय, कृष्ण=सत्य। गीता 4.7-8 (अवतार)। अत्याचार अंत निश्चित। प्रेम>भय। आंतरिक कंस (लोभ-मोह)=विवेक से नष्ट।
कंस वध = शाश्वत सन्देश: 1। कृष्ण = आत्मा/सत्य। कंस वध = अहंकार अंत = आत्मज्ञान। भय मुक्ति: कंस = भय में जीने वाला → क्रूर बना।
भय = सबसे बड़ा शत्रु। 7-8): 'यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति। ' धर्म हानि = अवतार। अत्याचार अंत: अत्याचार कितना भी शक्तिशाली = अंत निश्चित।
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