जातकर्म = चतुर्थ संस्कार, जन्म के तुरन्त बाद। मुख्य: शहद+घी सोने की शलाका से चटाना (मेधा-आयु-बल हेतु)। मेधा सूक्त पाठ, शिशु के कान में मंत्र, प्रथम स्तनपान। पिता मुख देखे, कुण्डली बनवाएँ। आधुनिक: चिकि
जातकर्म षोडश संस्कारों में चतुर्थ संस्कार है, जो शिशु के जन्म के तुरन्त बाद किया जाता है।
कब करें: - शिशु के जन्म के तुरन्त बाद — नाभिनाल (गर्भनाल) काटने से पूर्व या तुरन्त बाद। - आदर्श: जन्म के दिन ही।