जय-विजय भगवान विष्णु के वैकुण्ठ द्वारपाल थे। सनकादि ऋषियों (ब्रह्माजी के मानसपुत्र) ने शाप दिया — असुर योनि में जन्म लोगे। तीन जन्म — हिरण्याक्ष-हिरण्यकशिपु, रावण-कुम्भकर्ण, शिशुपाल-दन्तवक्र। रामावतार
जय-विजय भगवान विष्णु के वैकुण्ठ (विष्णुलोक) के द्वारपाल थे।
उन्हें सनकादि ऋषियों (सनक, सनन्दन, सनातन, सनत्कुमार — ब्रह्माजी के मानसपुत्र) ने शाप दिया।