सनातन सिद्धांत के अनुसार जन्म और मृत्यु एक अखंड चक्र है। आत्मा अजर-अमर है, केवल शरीर बदलता है। कर्मों के अनुसार अगली योनि मिलती है और यह चक्र मोक्ष प्राप्ति तक चलता रहता है।
सनातन धर्म में जीवन और मृत्यु को एक अखंड चक्र के रूप में देखा गया है, जो तब तक चलता रहता है जब तक जीवात्मा को मोक्ष की प्राप्ति नहीं हो जाती।
इस सिद्धांत का मूल आधार यह है — 'जो जन्मा है, वह मरेगा; और जो मरा है, वह फिर जन्म लेगा।