जीवात्मा स्थूल शरीर छोड़ने के बाद सूक्ष्म शरीर धारण करती है। यह सूक्ष्म शरीर मन, बुद्धि, अहंकार और इंद्रियों के सूक्ष्म तत्वों से बना होता है और अगले जन्म तक आत्मा के साथ रहता है।
गरुड़ पुराण और उपनिषदों के अनुसार, जब जीवात्मा स्थूल शरीर को त्यागती है तो वह पूरी तरह से निराकार नहीं हो जाती — बल्कि वह अपने 'सूक्ष्म शरीर' को धारण कर लेती है।
यह सूक्ष्म शरीर मन, बुद्धि, अहंकार और पाँच ज्ञानेन्द्रियों के सूक्ष्म तत्वों से मिलकर बना होता है।