पूजा विधि
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कालसर्प दोष पूजा त्र्यम्बकेश्वर में कैसे करवाएं?
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संक्षिप्त उत्तर
त्र्यम्बकेश्वर कालसर्प पूजा: ज्योतिषीय पुष्टि → अमावस्या/नागपंचमी शुभ → नागबलि/नारायण नागबलि → त्रिपिंडी श्राद्ध → राहु-केतु शांति हवन → रुद्राभिषेक → कुशावर्त स्नान → दान। अधिकृत मंदिर पुजारी से करवा
कालसर्प दोष तब बनता है जब कुंडली में सभी सात ग्रह (सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि) राहु और केतु के बीच आ जाते हैं।
त्र्यम्बकेश्वर (नासिक, महाराष्ट्र) में इसकी पूजा सबसे प्रसिद्ध और प्रभावी मानी जाती है क्योंकि यह बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है।
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