विस्तृत उत्तर
कालसर्प दोष तब बनता है जब कुंडली में सभी सात ग्रह (सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि) राहु और केतु के बीच आ जाते हैं। त्र्यम्बकेश्वर (नासिक, महाराष्ट्र) में इसकी पूजा सबसे प्रसिद्ध और प्रभावी मानी जाती है क्योंकि यह बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है।
त्र्यम्बकेश्वर में कालसर्प दोष पूजा
- 1ज्योतिषीय पुष्टि: सबसे पहले किसी विश्वसनीय ज्योतिषी से कुंडली में कालसर्प दोष की पुष्टि करवाएँ। कुंडली साथ लेकर जाएँ।
- 1शुभ मुहूर्त: पूजा के लिए अमावस्या या नाग पंचमी का दिन विशेष शुभ माना जाता है। मंदिर के पुजारी मुहूर्त बता सकते हैं।
- 1पूजा विधि:
- ▸नागबलि विधान (सर्प बलि — प्रतीकात्मक)
- ▸नारायण नागबलि (विशेष अनुष्ठान)
- ▸त्रिपिंडी श्राद्ध
- ▸कालसर्प शांति हवन
- ▸राहु-केतु शांति मंत्र जप
- ▸नवग्रह पूजन
- ▸रुद्राभिषेक (त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग का)
- 1विशेष अनुष्ठान:
- ▸कुशावर्त कुंड में स्नान (गोदावरी उद्गम)।
- ▸चाँदी या ताम्बे का नाग बनवाकर पूजा।
- ▸नाग देवता की विशेष पूजा।
- 1दान: काला तिल, काला वस्त्र, सर्प (चाँदी का), लोहे की वस्तु, सरसों तेल का दान।
- 1अवधि: पूजा सामान्यतः 3-4 घंटे की होती है। नारायण नागबलि 3 दिन का अनुष्ठान है।
व्यावहारिक जानकारी
- ▸त्र्यम्बकेश्वर मंदिर के अधिकृत पुजारी (गुरव) से ही पूजा करवाएँ।
- ▸बाहरी दलालों से सावधान रहें।
- ▸पूजा शुल्क मंदिर ट्रस्ट से पुष्टि करें।
ध्यान दें: कालसर्प दोष की अवधारणा पर विद्वानों में मतभेद है। कुछ प्राचीन ज्योतिषी इसे दोष नहीं मानते। पूजा करवाने से पहले विश्वसनीय ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।





