तिथि निर्णय
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कालाष्टमी व्रत की पूजा का सही समय (तिथि) क्या है?
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संक्षिप्त उत्तर
कालभैरव रात्रिकालीन देवता हैं, इसलिए यह व्रत उस दिन किया जाता है जब अष्टमी तिथि सूर्यास्त के बाद और मध्यरात्रि (निशीथ काल) में मौजूद हो।
धर्मसिंधु और निर्णयसिंधु के अनुसार, कालभैरव एक तामसिक शक्ति के नियंत्रक और रात्रिकालीन देवता हैं, जिनका प्राकट्य 'निशीथ काल' (मध्यरात्रि) में हुआ था।
अतः कालाष्टमी के व्रत में 'रात्रिव्यापिनी अष्टमी' (वह अष्टमी जो रात में विद्यमान हो) का सर्वाधिक महत्व है।
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