नित्य 108 जप (काली कृपा), विशेष संकट में 1008, अमावस्या को 1008। 21 दिन × 1008 = विशेष अनुष्ठान। पुरश्चरण = 6 लाख। कालिका पुराण: केवल 11 बार नित्य जप से भी काली की कृपा रहती है। संख्या से अधिक नियमितत
काली मंत्र जप की संख्या का वर्णन मंत्र महोदधि और कालिका पुराण में मिलता है: उद्देश्यानुसार जप संख्या: | उद्देश्य | जप संख्या | अवधि | |---------|-----------|-------| | नित्य मंगल | 108 (1 माला) | 15
अमावस्या पर विशेष: प्रत्येक अमावस्या को 1008 जप — यह 12 अमावस्या × 1008 = 12,096 — एक वर्ष में यह संख्या साधक को विशेष फल देती है।