विस्तृत उत्तर
काली मंत्र जप की संख्या का वर्णन मंत्र महोदधि और कालिका पुराण में मिलता है:
उद्देश्यानुसार जप संख्या
| उद्देश्य | जप संख्या | अवधि |
|---------|-----------|-------|
| नित्य मंगल | 108 (1 माला) | 15 मिनट |
| विशेष पूजा | 1008 (11 माला) | 2-3 घंटे |
| अमावस्या | 1008 | 1 रात |
| 21 दिन अनुष्ठान | 21 × 1008 | 21 दिन |
| पुरश्चरण | 6 लाख | 4-20 माह |
'ॐ क्रीं काल्यै नमः' जप
- ▸नित्य 108 — रोग, भय नाश
- ▸1008 — विशेष संकट में
- ▸21 दिन × 1008 — मनोकामना पूर्ति
माला का नियम
- ▸रुद्राक्ष माला — शिव-काली दोनों के लिए
- ▸काली के लिए विशेष — काली हकीक माला या रुद्राक्ष
- ▸सुमेरु न लांघें — माला पलटें
न्यूनतम जप
कालिका पुराण में कहा गया है — जो प्रतिदिन केवल 11 बार भी 'ॐ क्रीं काल्यै नमः' जपता है, उस पर काली की कृपा रहती है।
अमावस्या पर विशेष
प्रत्येक अमावस्या को 1008 जप — यह 12 अमावस्या × 1008 = 12,096 — एक वर्ष में यह संख्या साधक को विशेष फल देती है।
सार
संख्या से अधिक निरंतरता महत्वपूर्ण है। 108 जप प्रतिदिन नियमित — 1008 जप कभी-कभी — इससे बेहतर है।





