विस्तृत उत्तर
मंत्र जप की संख्या शास्त्रों में विस्तार से वर्णित है। मंत्र के अनुसार, उद्देश्य के अनुसार और साधक की स्थिति के अनुसार यह भिन्न होती है:
108 — पवित्र संख्या का रहस्य
हिंदू धर्म में 108 का विशेष महत्व है:
- ▸सूर्य का व्यास पृथ्वी से 108 गुना दूर है
- ▸चंद्रमा का व्यास भी पृथ्वी से 108 गुना दूर है
- ▸मानव शरीर में 108 ऊर्जा बिंदु (नाड़ी संधि) हैं
- ▸संस्कृत वर्णमाला के 54 अक्षर × 2 (शिव + शक्ति) = 108
नित्य जप संख्या
| स्तर | जप संख्या | माला | समय |
|------|-----------|------|------|
| न्यूनतम | 108 | 1 | 10-15 मिनट |
| मध्यम | 324 | 3 | 30-40 मिनट |
| उत्तम | 1008 | 11 | 90-120 मिनट |
| विशेष पर्व | 10,008 | 108 | पूरा दिन |
पुरश्चरण — मंत्र सिद्धि के लिए
मंत्र महोदधि के अनुसार प्रत्येक मंत्र अक्षर के लिए 1 लाख जप का विधान है:
| मंत्र के अक्षर | पुरश्चरण जप |
|---------------|-------------|
| 1 अक्षर (बीज) | 1,00,000 (1 लाख) |
| 5 अक्षर (पंचाक्षरी) | 5,00,000 (5 लाख) |
| 8 अक्षर | 8,00,000 (8 लाख) |
| 11 अक्षर | 11,00,000 (11 लाख) |
सवा लाख जप (1,25,000) — सर्वाधिक प्रचलित
सामान्यतः एक पुरश्चरण = सवा लाख (1,25,000) जप। यह लगभग 40-50 दिनों में पूरा होता है।
विशेष परिस्थिति जप
- ▸संकट में: उसी दिन 1008 बार
- ▸रोगनाशन: 40 दिन × 108 = 4320
- ▸कामना पूर्ति: 21 दिन × 108 = 2268
- ▸अनुष्ठान: नवरात्रि में 9 दिन × 1008 = 9072
दशांश नियम (पुरश्चरण के बाद)
पुरश्चरण पूर्ण होने पर:
- ▸कुल जप का 1/10 = हवन
- ▸हवन का 1/10 = तर्पण
- ▸तर्पण का 1/10 = मार्जन
- ▸मार्जन का 1/10 = ब्राह्मण भोजन
महत्वपूर्ण नियम
एक बार जो संख्या तय करें, उसे प्रतिदिन करें — न घटाएं। यदि किसी दिन छूट जाए तो अगले दिन दोगुना करें।





