विस्तृत उत्तर
जप की संख्या का नियम मंत्र महोदधि और धर्म सिंधु में वर्णित है:
मानक जप संख्याएं
| संख्या | प्रयोजन |
|--------|----------|
| 108 | एक माला — नित्य जप की न्यूनतम |
| 1008 | विशेष कामना या नियमित साधना |
| 10,000 | पुरश्चरण का एक दिन |
| 1,25,000 | मंत्र सिद्धि का पुरश्चरण (कई मंत्रों में) |
नित्य जप
मंत्र महोदधि — न्यूनतम 108 (एक माला) प्रतिदिन। जो नित्य 108 जप करे — उसे मंत्र का फल अवश्य मिलता है।
पुरश्चरण
मंत्र की सिद्धि के लिए पुरश्चरण की संख्या — मंत्र के अक्षरों × 1,00,000 गुणा:
- ▸5 अक्षरी मंत्र (पंचाक्षरी) = 5 × 1,00,000 = 5 लाख जप
- ▸8 अक्षरी (अष्टाक्षरी) = 8 लाख जप
संख्या से अधिक भाव
धर्म सिंधु: संख्या से अधिक भाव और नित्यता महत्वपूर्ण है। एक माला भाव से > 10 माला यांत्रिक जप।
108 की न्यूनतमता
यदि समय कम हो — 11 जप भी पर्याप्त हैं। 'नामस्मरणमात्रेण मुक्तिः' — नाम स्मरण मात्र से मुक्ति।





