विस्तृत उत्तर
महामृत्युंजय मंत्र की जप संख्या का वर्णन मंत्र महोदधि और शिव पुराण में मिलता है:
उद्देश्यानुसार जप संख्या
| उद्देश्य | जप संख्या | अवधि |
|---------|-----------|-------|
| नित्य मंगल | 108 (1 माला) | 15-20 मिनट |
| सामान्य रोग | 1008 (11 माला) | 2-3 घंटे |
| गंभीर रोग/संकट | 10,008 | 1-2 दिन |
| 21 दिन अनुष्ठान | 21 × 1008 = 21,168 | 21 दिन |
| पूर्ण पुरश्चरण | 1,25,000 (सवा लाख) | 40-50 दिन |
108 का महत्व
108 संख्या पवित्र है — 12 राशि × 9 ग्रह = 108। एक माला = 108 मनके। नित्य 108 जप रोग और भय से रक्षा करता है।
1,25,000 — पुरश्चरण
मंत्र महोदधि में कहा गया है कि प्रत्येक अक्षर के लिए एक लाख जप का विधान है। महामृत्युंजय के विभिन्न गणनाओं के अनुसार पुरश्चरण सवा लाख (1,25,000) माना जाता है।
पुरश्चरण की दैनिक गणना
- ▸प्रतिदिन 1000 जप → सवा लाख = 125 दिन
- ▸प्रतिदिन 2500 जप → सवा लाख = 50 दिन
- ▸प्रतिदिन 5000 जप → सवा लाख = 25 दिन
विशेष परिस्थितियाँ
- 1मृत्युतुल्य रोग: 40 दिन × 1008 = अनुष्ठान
- 2जन्म-मृत्यु संकट: लगातार जप — संख्या से अधिक भाव महत्वपूर्ण
- 3ग्रह दोष: 11000 जप — एकादश हजार
दशांश नियम (पुरश्चरण के बाद)
- ▸सवा लाख जप के बाद → 1/10 = 12,500 हवन आहुति
- ▸हवन के बाद → 1/10 = 1,250 तर्पण
- ▸फिर → ब्राह्मण भोजन
सार
शिव पुराण का वचन — शिव आशुतोष हैं। जो नित्य केवल 11 बार भी महामृत्युंजय जपता है, उस पर शिव की कृपा रहती है। संख्या से अधिक श्रद्धा और निरंतरता महत्वपूर्ण है।
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