चार प्रभाव — (1) देवता डर गये (शिवपुत्र बिना तारकासुर नहीं मरेगा), (2) असुर सुखी हुए, (3) भोगी चिन्तित हुए कामसुख याद कर, (4) साधक-योगी निष्कंटक (काम-बाधा से मुक्त) हो गये।
कामदेव के भस्म होने से जगत में मिश्रित प्रभाव पड़ा — कुछ लोग दुखी हुए, कुछ सुखी। चौपाई — 'हाहाकार भयउ जग भारी। डरपे सुर भए असुर सुखारी।
समुझि कामसुखु सोचहिं भोगी। भए अकंटक साधक जोगी॥' इसका अर्थ — जगतमें बड़ा हाहाकार मच गया।