कामदेव ने भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के पुत्र प्रद्युम्न के रूप में पुनर्जन्म लिया। शंबरासुर का वध करने के बाद उनकी पत्नी रति (मायावती रूप में) से पुनर्मिलन हुआ।
कामदेव के भस्म होने के बाद उनकी पत्नी रति ने भगवान शिव से प्रार्थना की और बताया कि कामदेव ने यह सब देवहित के लिए किया था।
शिव का मन पिघला और उन्होंने वरदान दिया कि द्वापर युग में कामदेव भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के पुत्र प्रद्युम्न के रूप में जन्म लेंगे।