कामदेव के शरीर को शिव के तृतीय नेत्र ने भस्म किया। पुनर्जीवन मिला पर शरीर नहीं — केवल प्रेम-शक्ति के रूप में। इसीलिए वे 'अनंग' (बिना शरीर के) कहलाए। द्वापर में कृष्ण-पुत्र प्रद्युम्न के रूप में पुनः ज
'अनंग' का संस्कृत में अर्थ है — 'अ+अंग' = बिना अंग (शरीर) के। कारण — शिव के तृतीय नेत्र की अग्नि ने कामदेव के शरीर को भस्म कर दिया।
जब शिव ने रति की प्रार्थना और पार्वती के निवेदन पर कामदेव को पुनर्जीवित किया तो उन्हें सशरीर जीवन नहीं मिला।