कामदेव ने देवताओं के निर्देश पर पुष्प-बाण से शिव की समाधि भंग की। क्रोधित शिव ने तृतीय नेत्र खोला और कामदेव भस्म हो गए। शिव वासना के विरोधी हैं — यही उनके दंड का दार्शनिक कारण है।
कामदेव के भस्म होने की कथा शिव पुराण, स्कंद पुराण और भागवत पुराण में वर्णित है।
सीधा कारण — देवताओं के अनुरोध पर कामदेव ने भगवान शिव पर अपना 'पुष्प-बाण' चलाया। उस बाण से शिव की गहरी समाधि भंग हो गई।