कपटमुनि ने कहा — मैं रसोई बनाऊँ, तुम परोसो, जो खायगा वह तुम्हारा दास बनेगा। राजा ने एक लाख ब्राह्मणों को बुलवाया। कपटमुनि ने भोजन में माँस मिला दिया। परोसते समय आकाशवाणी हुई — 'यह अन्न मत खाओ, इसमें म
कपटमुनि ने प्रतापभानु से बड़ा छलकपट किया।
उसने राजा से कहा कि यदि मैं रसोई बनाऊँ और तुम उसे ब्राह्मणों को परोसो — और मुझे कोई जानने न पावे — तो उस अन्न को जो-जो खायगा, वह तुम्हारा आज्ञाकारी बन जायगा।