कर्म बड़ा है क्योंकि भाग्य स्वयं कर्म का फल है। पूर्व के कर्म ही वर्तमान का भाग्य बनते हैं और वर्तमान के कर्म ही भविष्य का भाग्य बनाते हैं। महाभारत में भी कहा है कि कर्म के बिना भाग्य टिक नहीं सकता।
हिंदू दर्शन और वेदांत के अनुसार कर्म ही बड़ा है, क्योंकि भाग्य स्वयं कर्म का ही एक रूप है।
जो हम आज भाग्य कहते हैं, वह कल के किसी कर्म का फल है। इसलिए मूल में कर्म ही है।