कर्ण का कवच-कुंडल उनके पिता सूर्यदेव का दिव्य वरदान था। माता अदिति के दिव्य कुंडलों सहित यह जन्म के साथ ही शरीर पर था। इसे देने वाले सूर्यदेव स्वयं थे।
कर्ण का कवच-कुंडल उनके पिता सूर्यदेव ने दिया था — या अधिक सटीक रूप से कहें तो यह स्वयं जन्म के साथ ही उनके शरीर पर था।
वाल्मीकि महाभारत की एक कथा के अनुसार, जब सूर्यदेव कुंती के आह्वान पर प्रकट हुए और उन्होंने पुत्र देने का वचन दिया, तब उन्होंने कहा — 'तुम्हारा पुत्र माता अदिति के दिए दिव्य कुंडलों और कवच को लेकर पैदा