कर्ण का कवच-कुंडल जन्म से ही शरीर पर था — सूर्यदेव का दिव्य वरदान। यह शरीर का अभिन्न अंग था, अभेद्य था, और कोई भी अस्त्र इसे नहीं भेद सकता था। जब तक था — कर्ण अजेय थे।
कर्ण का कवच-कुंडल महाभारत के सबसे चर्चित दिव्य रत्नों में से एक है। कर्ण सूर्यदेव के पुत्र थे।
जन्म के समय उनके शरीर पर एक दिव्य कवच और कानों में दिव्य कुंडल विद्यमान थे।