कर्ण के धनुष का नाम 'विजय' था जिसे परशुराम ने उसे दिया था। यह अखंड था, पाशुपतास्त्र से भी इसका घेरा नहीं टूटता था। यह धनुष न होने पर ही कर्ण का वध हो सका।
कर्ण के धनुष का नाम 'विजय' था। यह महाभारत के सबसे शक्तिशाली और रहस्यमय दिव्य धनुषों में से एक था।
विजय धनुष का इतिहास — इसे विश्वकर्मा ने त्रिपुरासुर के विनाश के लिए बनाया था और भगवान शिव ने इसी से पाशुपतास्त्र चलाकर त्रिपुर-संहार किया था।