विजय धनुष अखंड और अभेद्य था। इससे चलाने वाले के चारों ओर सुरक्षा-घेरा बनता था जो पाशुपतास्त्र भी नहीं भेद सकता। इस धनुष को हाथ से छोड़ने पर ही कर्ण का वध संभव हुआ।
विजय धनुष कर्ण का सर्वाधिक महत्वपूर्ण अस्त्र था जिसकी विशेषताएं अद्वितीय थीं।
यह धनुष विश्वकर्मा ने भगवान शिव के लिए त्रिपुरासुर के विनाश के लिए बनाया था।