षोडश संस्कार
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कर्णवेध संस्कार का क्या महत्व है
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संक्षिप्त उत्तर
कर्णवेध = कान छेदन संस्कार। कब: 3-5 वर्ष (या 6-7 मास), शुभ मुहूर्त। महत्व: (1) वैदिक संस्कार — रक्षात्मक। (2) सुश्रुत संहिता: हर्निया/अंडकोष वृद्धि से रक्षा, मस्तिष्क विकास बिन्दु। विधि: गणपति पूजन →
कर्णवेध (कान छेदना) षोडश संस्कारों में एक महत्वपूर्ण संस्कार है। इसमें बालक/बालिका के कान छेदे जाते हैं।
कब करें: - सामान्यतः जन्म के तीसरे या पाँचवें वर्ष में। - कुछ परम्पराओं में 6-7 मास या 1 वर्ष में भी किया जाता है।
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शास्त्रीय प्रमाण सहित विस्तृत उत्तर
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