कार्तिकेय को छह सिर इसलिए हैं क्योंकि उनका दिव्य तेज गंगाजल में बहकर छह भागों में विभाजित हो गया था और छह शिशुओं के रूप में प्रकट हुआ। माता पार्वती ने छहों को एक करके षड्मुख पुत्र प्राप्त किया।
कार्तिकेय को छह सिर इसलिए हैं क्योंकि उनका जन्म उस दिव्य तेज से हुआ था जो गंगाजल में बहकर छह भागों में विभाजित हो गया था और छह अलग-अलग शिशुओं के रूप में प्रकट हुआ था।
पुराणों के अनुसार शिव जी का दिव्य तेज अग्नि से होते हुए गंगा को मिला।