कार्तिकेय को 'स्कंद' इसलिए कहते हैं क्योंकि उनका जन्म शिव-तेज के गंगाजल में स्खलित होने से शरवण वन में हुआ। 'स्कंद' का अर्थ है स्खलित होकर प्रकट होने वाला। शत्रु-सेना को छिन्न करने वाले योद्धा के अर्थ
कार्तिकेय को 'स्कंद' कहने के पीछे एक विशेष पौराणिक और व्युत्पत्ति-सम्बन्धी कारण है।
संस्कृत में 'स्कंद' शब्द 'स्कद्' धातु से बना है जिसका अर्थ है 'स्खलित होना' या 'गिरना'।