गरुड़ पुराण में प्रेत योनि के कारणभूत कर्म — दूसरों की संपत्ति हड़पना, मित्र-द्रोह, व्यभिचार, ब्राह्मण-पीड़न, परिजनों का त्याग, ईश्वर-विमुखता, दान न करना, कन्या-विक्रय और अकाल मृत्यु।
गरुड़ पुराण के प्रेतकल्प में प्रेत योनि के कारणभूत कर्मों की स्पष्ट सूची दी गई है।
गरुड़ पुराण में सीधे वर्णित है — 'जो व्यक्ति दूसरों की संपत्ति हड़प कर जाता है, मित्र से द्रोह करता है, विश्वासघात करता है, ब्राह्मण अथवा मंदिर की संपत्ति का हरण करता है, स्त्रियों और बच्चों का संग्रह