पहली कथा — नर-नारायण ऋषि की तपस्या से शिव केदार श्रृंग पर ज्योतिर्लिंग रूप में विराजे। दूसरी कथा — पांडव भ्रातृहत्या पाप से मुक्ति के लिए आए, शिव भैंसा बने, भीम ने पीठ पकड़ी, वही त्रिकोणाकार भाग केदार
केदारनाथ ज्योतिर्लिंग उत्तराखंड के हिमालय में 3,583 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। यह 12 ज्योतिर्लिंगों में 11वाँ और पंचकेदार में प्रथम है।