केरल दारुकजित विद्या में घंटाकर्ण शिव के कर्ण-मल से उत्पन्न — भद्रकाली के रक्षक 'पुलि-भैरव'। प्रेत-बाधा और नकारात्मक ऊर्जाओं से रक्षा उनकी भूमिका। तीनों परंपराओं में वे उग्र रक्षक देवता हैं।
केरल की तांत्रिक विद्या (दारुकजित विद्या) में घंटाकर्ण का सर्वथा भिन्न स्वरूप मिलता है।
इस परंपरा के अनुसार घंटाकर्ण शिव के कर्ण-मल (Ear wax) से उत्पन्न हुए।