शिव पुराण के अनुसार केतकी के फूल ने ब्रह्माजी के पक्ष में झूठी गवाही दी थी। इसलिए भगवान शिव ने उसे श्राप दिया कि वह कभी उनकी पूजा में स्वीकार नहीं होगा। तभी से केतकी शिव पूजा में वर्जित है।
केतकी (केवड़ा) का फूल अत्यंत सुगंधित और सुंदर होता है, फिर भी शिव पूजा में इसे चढ़ाना पूर्णतः वर्जित है।
इसके पीछे शिव पुराण में वर्णित एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा है। एक बार ब्रह्माजी और भगवान विष्णु में विवाद हो गया कि दोनों में श्रेष्ठ कौन है।