कीर्तन में नाचने से तन-मन-वाणी तीनों समर्पित होते हैं, अहंकार टूटता है और भीतर का आनंद बाहर प्रकट होता है — यही भक्ति की गहराई है। मीरा और चैतन्य दोनों के जीवन में यह स्पष्ट है।
कीर्तन में नाचना — यह भक्ति की सबसे स्वाभाविक और सहज अभिव्यक्ति है।
मीराबाई ने मंदिर में नाचा, चैतन्य महाप्रभु ने नाम-संकीर्तन करते हुए नाचा — यह परंपरा अत्यंत प्राचीन है।