हिंदू धर्म में किस्मत को 'प्रारब्ध' कहते हैं — यह हमारे पूर्व जन्मों के संचित कर्मों में से उस अंश का फल है जो इस जन्म में भोगने के लिए निर्धारित है। यह कोई अंधी शक्ति नहीं बल्कि स्वयं हमारे ही कर्मों
हिंदू धर्म में 'किस्मत' या 'भाग्य' को 'प्रारब्ध' कहा जाता है।
यह कोई रहस्यमय या अंधी शक्ति नहीं है — यह हमारे स्वयं के पूर्व कर्मों का सुनियोजित फल है। शास्त्रों के अनुसार, कर्म तीन रूपों में होता है।