कृष्ण नाराज नहीं होते — परंतु जब जीवन में प्रेम और सहजता गायब हो, अहंकार बढ़े, संबंध टूटें और भजन में भाव न जागे — तब कृष्ण से दूरी बन रही है। गीता पाठ, 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' जप और क्षमायाचना से पुन
भगवान कृष्ण ने स्वयं गीता में कहा है कि वे सबके हृदय में विराजमान हैं और सबके उद्धार के लिए सदा तत्पर हैं।
वे 'नाराज' नहीं होते — परंतु जब हम उनसे दूर जाते हैं तो जीवन में वह प्रेम, शांति और सहजता गायब हो जाती है जो उनकी कृपा से मिलती है।