कुरुक्षेत्र में युद्ध से पहले अर्जुन अपने स्वजनों को देखकर मोह और शोक में डूब गए और युद्ध करने से इनकार कर बैठे। उनके इस अज्ञानजनित मोह को दूर करने और धर्म के सही स्वरूप को समझाने के लिए श्रीकृष्ण ने
कुरुक्षेत्र के रणक्षेत्र में दोनों सेनाओं के बीच जब युद्ध आरंभ होने को था, तब अर्जुन ने अचानक अपना धनुष गांडीव रख दिया और वे रथ में बैठकर शोक और मोह से ग्रस्त हो गए।
अर्जुन के मन में विचार आए — इस युद्ध में सामने खड़े हैं मेरे गुरु द्रोणाचार्य, पितामह भीष्म, भाई-बंधु और सम्बन्धी।