क्षमा प्रार्थना में भक्त स्वीकार करता है कि मुझसे रात-दिन हजारों अपराध होते हैं, मुझे आवाहन-विसर्जन-पूजाविधि ठीक से नहीं आती, और जो मंत्रहीन-भक्तिहीन पूजन हुआ है — उसे आपकी कृपा से पूर्ण करें और मुझे
पूजा के अंत में की जाने वाली क्षमा प्रार्थना भक्त की विनम्रता और समर्पण का सबसे सुंदर भाव है।
यह मंत्र इस सत्य को स्वीकार करता है कि मनुष्य कितना भी प्रयत्न करे, पूजा में कहीं न कहीं न्यूनता रह ही जाती है — इसीलिए प्रभु से क्षमा माँगी जाती है।