विस्तृत उत्तर
पूजा के अंत में की जाने वाली क्षमा प्रार्थना भक्त की विनम्रता और समर्पण का सबसे सुंदर भाव है। यह मंत्र इस सत्य को स्वीकार करता है कि मनुष्य कितना भी प्रयत्न करे, पूजा में कहीं न कहीं न्यूनता रह ही जाती है — इसीलिए प्रभु से क्षमा माँगी जाती है।
क्षमा प्रार्थना के प्रमुख श्लोक और उनका हिंदी अर्थ:
१. अपराधसहस्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया।
दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वरि॥
अर्थ: हे परमेश्वरि! मेरे द्वारा रात-दिन हजारों अपराध होते रहते हैं। 'यह मेरा दास है' — ऐसा जानकर मेरे सब अपराध क्षमा करो।
२. आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्।
पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वरि॥
अर्थ: हे परमेश्वरि! मुझे आवाहन करना नहीं आता, विसर्जन करना नहीं आता, पूजा-विधि भी नहीं जानता — कृपया मुझे क्षमा करो।
३. मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वरि।
यत्पूजितं मया देवि परिपूर्णं तदस्तु मे॥
अर्थ: हे सुरेश्वरि! मैंने जो मंत्रहीन, क्रियाहीन और भक्तिहीन पूजन किया है, वह सब आपकी कृपा से पूर्ण हो जाए।
४. अज्ञानाद्विस्मृतेर्भ्रान्त्या यन्न्यूनमधिकं कृतम्।
तत्सर्वं क्षम्यतां देवि प्रसीद परमेश्वरि॥
अर्थ: अज्ञान से, भूल से या भ्रम के कारण जो भी कमी-अधिकता हुई हो — हे देवि! वह सब क्षमा करो और प्रसन्न हो जाओ।
यह क्षमा प्रार्थना दुर्गासप्तशती की पारम्परिक विधि का अंग है और सभी देवी-देवताओं की पूजा में प्रयुक्त होती है।





