कुबेर (धन रक्षक) और अष्टलक्ष्मी (धन रचयिता) के संयुक्त मंत्र का उत्तर दिशा की ओर मुख करके कमल गट्टे की माला से जप करने पर धन का आना और टिकना दोनों सुनिश्चित होता है।
कुबेर धन के रक्षक (कोषाध्यक्ष) हैं और अष्टलक्ष्मी धन, ऐश्वर्य, संतान, विद्या आदि आठ प्रकार की संपदाओं की दाता (रचयिता) हैं।
जब केवल लक्ष्मी की पूजा की जाती है, तो धन आता तो है लेकिन रुकता नहीं।