कुक्कुटेश्वर शिवलिंग और हठयोग के 'कुक्कुटासन' में क्या संबंध है?
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संक्षिप्त उत्तर
कुक्कुटासन मूलाधार चक्र और कुण्डलिनी जाग्रत करता है। कुक्कुटेश्वर लिंग की साधना इसी यौगिक ऊर्जा का केंद्र है जो आलस्य (तमोगुण) का नाश कर चेतना को ऊपर उठाती है।
हठयोग के ग्रंथों (हठयोग प्रदीपिका और घेरण्ड संहिता) में वर्णित 'कुक्कुटासन' का मुख्य उद्देश्य मूलाधार चक्र का प्रबल उद्दीपन और प्रसुप्त कुण्डलिनी शक्ति का जागरण है।
इस आसन के अभ्यास से साधक के भीतर से तमोगुण (आलस्य और प्रमाद) का समूल नाश होता है।