बुजुर्गों से पूछें, पैतृक गांव का मंदिर, गोत्र आधारित। न मिले तो कुंडली/ध्यान। बिल्कुल न मिले तो गणेश या दुर्गा मानकर पूजा शुरू करें — श्रद्धा से की पूजा निष्फल नहीं।
बहुत से परिवारों में आज कुलदेवता की जानकारी लुप्त हो गई है। पहचान के उपाय इस प्रकार हैं।
सबसे पहले परिवार के बुजुर्गों से पूछें — दादा-दादी, बड़े चाचा, फूफा आदि को प्रायः पता होता है कि पूर्वज किस देवता की पूजा करते थे।