कुंडलिनी
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कुंडलिनी जागरण होने पर शरीर में क्या बदलाव आते हैं?
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संक्षिप्त उत्तर
तत्काल: रीढ़ विद्युत, ज्योति per चक्र, कंपन, ताप। दीर्घ: रोग↓, इंद्रियां↑, नींद↓, सात्विक स्वतः। बिना गुरु = कष्ट। अमर उजाला: 'बिजली कौंधना।'
कुंडलिनी जागरण — शारीरिक बदलाव: तत्काल: 1। ऊर्जा प्रवाह: रीढ़ = विद्युत/गर्मी/ठंडक — 'बिजली कौंधना' (अमर उजाला)।
ज्योति: मूलाधार=अग्नि, स्वाधिष्ठान=प्रवाल, मणिपुर=विद्युत, अनाहत=लिंग, विशुद्ध=श्वेत, आज्ञा=धूम्र, सहस्रार=परशु।
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