कुंडलिनी योग
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कुंडलिनी जागरण के बाद भावनात्मक उथल-पुथल क्यों होती है?
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संक्षिप्त उत्तर
कारण: दबी भावनाएँ सतह पर, अनाहत शुद्धि, अहंकार विघटन, संवेदनशीलता↑, कर्म-दहन। उपाय: स्वीकार, रोना=शुद्धि, जर्नलिंग, प्रकृति, व्यायाम, धैर्य। अवसाद/आत्मघाती=तुरंत विशेषज्ञ।
कुंडलिनी बाद भावनात्मक उथल-पुथल = सामान्य+अपेक्षित।
कारण: (1) संचित दबी भावनाएँ (क्रोध/दुःख/भय) चक्रों में संग्रहित — शुद्धि पर सतह पर = अचानक रोना/क्रोध/दुःख (2) अनाहत (हृदय) शुद्धि = तीव्रतम — पुरानी पीड़ाएँ, बचपन आघात उभरना (3) अहंकार विघटन — पहचान
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