कुंडलिनी योग
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कुंडलिनी जागरण में गुरु का मार्गदर्शन क्यों आवश्यक है?
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संक्षिप्त उत्तर
अनिवार्य: सुरक्षा (शक्तिशाली ऊर्जा), शक्तिपात=सबसे सुरक्षित, भ्रम vs दिव्य=गुरु बताए, साधना समायोजन, अहंकार नियंत्रण। शिव संहिता: 'गुरु कृपा से कुंडलिनी।' बिना=सिंड्रोम/अस्थिरता/पतन।
गुरु = 'अनिवार्य' (केवल अनुशंसित नहीं)।
कारण: (1) सुरक्षा — अत्यन्त शक्तिशाली ऊर्जा, बिना मार्गदर्शन खतरनाक (उच्च-वोल्टेज बिजली बिना प्रशिक्षण) (2) शक्तिपात — सबसे सुरक्षित+तीव्र विधि, गुरु अपनी शक्ति शिष्य में प्रवाहित (3) अनुभव-आधारित — भ
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