कुंडलिनी योग
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कुंडलिनी जागरण में रीढ़ में बिजली दौड़ने जैसा अनुभव क्यों होता है?
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संक्षिप्त उत्तर
कारण: कुंडलिनी सुषुम्ना (रीढ़ भीतर) से ऊपर = तीव्र ऊर्जा। इड़ा-पिंगला विलय। 3 ग्रन्थि (ब्रह्म/विष्णु/रुद्र) भेदन = तीव्रतम। प्रकार: झनझनाहट→करंट→तरंग→कम्पन। सामान्य — भयभीत नहीं। दर्दनाक=गुरु।
रीढ़ में बिजली/करंट = कुंडलिनी जागरण का सर्वाधिक प्रचलित अनुभव। कारण (शास्त्रीय): 1। सुषुम्ना नाड़ी: रीढ़ भीतर सूक्ष्म नाड़ी।
कुंडलिनी इसी से मूलाधार→सहस्रार। प्रवेश = तीव्र ऊर्जा = बिजली।
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