कुंती ने अविवाहित अवस्था में सूर्यदेव के वरदान से कर्ण को जन्म दिया था। उस युग में अविवाहित माँ का होना घोर सामाजिक अपमान था। लोक-लाज और परिवार की मर्यादा के भय से उन्होंने उस नवजात को नदी में बहा दिय
कुंती का कर्ण को नदी में बहा देना महाभारत की सबसे हृदय-विदारक घटनाओं में से एक है।
इसके पीछे कोई क्रूरता नहीं थी, बल्कि एक माँ की विवशता, भय और उस युग की सामाजिक मर्यादाओं का दबाव था।