हाँ, गरुड़ पुराण के अनुसार प्रेत-आत्मा 13 दिनों तक परिजनों के पास रहती है। मोहग्रस्त आत्माएँ लंबे समय तक घर के पास भटकती हैं। परिजन उसे देख-सुन नहीं पाते — यही उसकी पीड़ा है।
हाँ, गरुड़ पुराण में स्पष्ट वर्णन है कि प्रेत-आत्मा अपने परिजनों के पास रहती है — विशेषकर मृत्यु के बाद के 13 दिनों में।
गरुड़ पुराण में वर्णन है — मृत्यु के बाद जीवात्मा 13 दिनों तक अपने परिजनों के बीच रहती है। वह अपने घर, अपने प्रियजनों को देखती है।